🔊 मधुर आवाज़ में पाठ सुनें:
यह बटन दबाते ही कवच का संपूर्ण पाठ शुरू हो जाएगा। लेकिन ये टूल सिर्फ Google Chrome (Browser) पर ही काम करेगा।जय श्री राम! सनातन परंपरा में भगवान हनुमान जी के 'पंचमुखी' स्वरूप को अत्यंत जाग्रत और अलौकिक शक्तियों का केंद्र माना गया है। तंत्र शास्त्र और पुराणों के अनुसार, जब अहिरावण ने भगवान राम और लक्ष्मण का हरण कर लिया था, तब पाताल लोक में उसकी पांच दिशाओं के दीपकों को एक साथ बुझाने के लिए बजरंगबली ने यह अद्भुत रूप धारण किया था।
गीता प्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित ग्रंथों में इस प्रसंग का बहुत ही सुंदर विवरण मिलता है। पंचमुखी हनुमान जी के पांच मुख क्रमशः पूर्व में वानर, दक्षिण में नरसिंह, पश्चिम में गरुड़, उत्तर में वराह और आकाश की ओर हयग्रीव मुख हैं। इस परम शक्तिशाली रूप की स्तुति के लिए रचित श्री पंचमुखी हनुमान कवच का पाठ करने से साधक के जीवन के सभी मानसिक, शारीरिक, तांत्रिक और सांसारिक कष्ट क्षण भर में नष्ट हो जाते हैं।
पंचमुखी हनुमान कवच का पाठ एवं हिंदी अर्थ
🎯 कवच पाठ करने की सरल एवं प्रामाणिक विधि:
यदि आप किसी विशेष संकट या मनोरथ सिद्धि के लिए इस कवच का पाठ कर रहे हैं, तो नीचे दी गई विधि सर्वोत्तम है:
- मंगलवार या शनिवार के दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं।
- उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके कुशा या ऊन के आसन पर बैठें।
- सामने पंचमुखी हनुमान जी का चित्र स्थापित करें और घी का दीपक प्रज्वलित करें।
- सर्वप्रथम भगवान श्री राम और माता सीता का स्मरण कर उनका आशीर्वाद लें, क्योंकि राम जी के स्मरण के बिना हनुमान जी की पूजा अधूरी मानी जाती है।
- इसके पश्चात पूरी श्रद्धा के साथ इस कवच का शांत चित्त होकर पाठ करें या ऊपर दिए गए ऑडियो प्लेयर के माध्यम से इसे पूर्ण एकाग्रता से सुनें।
फलश्रुति (महिमा)
श्री पंचमुखी हनुमान कवच भगवान शिव के ग्यारहवें रुद्र अवतार की साक्षात कृपा है। जो भी मनुष्य नित्य इसका पाठ करता है, उसके चारों ओर एक अभेद्य सुरक्षा कवच बन जाता है। उसे न तो ग्रह दोष (जैसे शनि की साढ़ेसाती या राहु-केतु) परेशान करते हैं, और न ही कोई मानसिक अवसाद छू पाता है। जीवन में चारों ओर विजय और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
॥ जय श्री राम ॥ ॥ जय बजरंगबली ॥